क्या मुख्य मंत्री आयुष विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करेगें ?

मध्यप्रदेश सामान्य विभाग के एक आला अधिकारी ने खबर टूडे प्रतिनिधि को बताया कि विलुप्त होती जनजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मध्य प्रदेश में सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति के बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए राज्य सरकार ने नौकरी में विशेष छूट का प्रावधान किया है। जिसके संबंध में सरकार ने 16 फरवरी 2018 को वकायदा राजपत्र प्रकाशित कर सभी विभागों को निर्देशित भी किया है। इस समय सरकार के आयुष विभाग में सैकड़ों आवेदन प्रशासनिक उदासीनता के चलते पेंडिग पड़े हुए हैं।

मध्यप्रदेश में विलुप्त होती जनजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार द्वारा तमाम परियोजनाओं के जरिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते ये योजनाएं उनकी पहुंच से काफी दूर हैं। यही नहीं इन जनजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मध्य प्रदेश में सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति के बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए राज्य सरकार ने नौकरी में विशेष छूट का प्रावधान भी किया है । उन्हें नौकरी के लिए सिर्फ आवेदन करना होगा, परीक्षा अथवा साक्षात्कार प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना पड़ेगा। विभाग द्वारा सीधे नियुक्त किया जाएगा।
इस संवंध में राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए बनाए गए लोकसेवा अधिनियम, 1994 की धारा 13 में मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अधिनियम 1998 के आरक्षण व भर्ती नियम में संशोधन भी कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति से संबंध रखने वाले आवेदकों के पास तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के किसी भी पद के लिए न्यूनतम योग्यता होगी, उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए बिना उक्त पद पर सीधे नियुक्त किया जाएगा। सरकार कागजों में कितनी भी योजनाएं बना ले लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते ये योजनाएं उनकी पहुंच से काफी दूर हैं।

प्रशासनिक उदासीनता के चलते नियुक्त नसीब नहीं

मध्यप्रदेश सामान्य विभाग के एक आला अधिकारी ने खबर टूडे के प्रतिनिधि को बताया कि विलुप्त होती जनजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मध्य प्रदेश में सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति के बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए राज्य सरकार ने नौकरी में विशेष छूट का प्रावधान किया है। जिसके संबंध में सरकार ने 16 फरवरी 2018 को वकायदा राजपत्र प्रकाशित कर सभी विभागों को निर्देशित भी किया है। इस समय सरकार के आयुष विभाग में सैकड़ों आवेदन प्रशासनिक उदासीनता के चलते पेंडिग पड़े हुए हैं।

क्रियान्वयन के नाम पर रटा–रटाया एक ही जवाब ‘कार्यवाही प्रक्रियाधीन’

मध्यप्रदेश के तत्कालीन विधायक आरडी प्रजापति ने आयुक्त,आयुष विभाग सतपुड़ा भवन भोपाल को लिखें पत्र में प्रदेश के सहरिया, बैगा और भारिया जनजाति के बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए राज्य सरकार के मंशा अनुरुप नियुक्ति प्रदान करने का आग्रह करतें हुए स्पष्ट किया था कि मुख्यमंत्री के जन -आशीर्वाद यात्रा के दौरान मिलें सैकड़ों शिकायती आवेदनों को वाकायदा आयुक्त,आयुष विभाग सतपुड़ा भवन भोपाल को भेजा गया था परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस बारे में विधान सभा प्रश्न भी लगें हैं परन्तु नियुक्तियाँ अभी तक किसी को भी नसीब नहीं हुई हैं।
वही विधायक जालम सिंह पटेल एवं विधायक ग्यारसी लाल रावत के विधानसभा सत्र फरवरी -मार्च 2021 के तारांकित प्रश्न क्रमांक 5196 तथा प्रश्न क्रमांक 6302 के उत्तर में आयुष विभाग ने वाकायदा स्वीकार किया है कि आयुष विभाग के संचालनालय में वर्ष 2018 से सैकड़ो आवेदन पेंडिग हैं। क्रियान्वयन के नाम पर रटा – रटाया एक ही जवाब ‘कार्यवाही प्रक्रियाधीन’ है। अब प्रश्न उठना लाजमी है कि वर्ष 2018 से विभाग को मिलें आवेदनों पर कब तक कार्यवाही प्रक्रियाधीन रहेगी ? वही विधायक एड.बैजनाथ कुशवाहा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि आयुष विभाग के लापरवाह और उदासीन अधिकारियों पर तत्काल कार्यवाही की जाएं।

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