मन वाणी कर्म से की गई माँ गौरी की इस स्तुति से मिलता है मनचाहा वर

मन वाणी कर्म से माँ गौरी की गई इस स्तुति से मिलता है मनचाहा वर

श्री राम चरित मानस प्रसंग में यह प्रमाणित है कि जगत जननी माँ सीता ने मनचाहा वर पाने के लिए माँ गौरी का पूजन किया था। माँ गौरी प्रसन्न हो कर देवी सीता को श्री राम के रूप में मनचाहा वर प्रदान किया था।

माँ जानकी ने देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए जो स्तुति का पाठ किया था वही यहां प्रस्तुत है।
मन वाणी कर्म से इस स्तुति का पढ़कर कुंवारी कन्याएं माँ गौरी के वरदान से मनचाहा वर प्राप्त कर सकती हैं।

माँ गौरी स्तुति

जय जय गिरिराज किसोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी॥

जय गजबदन षडानन माता।
जगत जननि दामिनी दुति गाता॥

देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥

मोर मनोरथ जानहु नीकें।
बसहु सदा उर पुर सबही के॥

कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥

बिनय प्रेम बस भई भवानी।
खसी माल मुरति मुसुकानि॥

सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ।
बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥

सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥

नारद बचन सदा सूचि साचा।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

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