“अटल प्रोग्रेस-वे” : मध्य प्रदेश के उपचुनाव में ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर “प्रोग्रेस-वे” को भुनाने की तैयारी

अटल प्रोग्रेस-वे : मध्य प्रदेश के उपचुनाव
शिवराज की इस घोषणा को मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों के होने वाले उपचुनाव से देखा जा रहा है। ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर उपचुनाव होना है। ये उपचुनाव ही सरकार का भविष्य तय करने वाले हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व मंत्री वर्तमान बीजेपी से राज्य सभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी इस प्रोजेक्ट में विशेष दिलचस्पी है। सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को इस मुद्दे पर पत्र भी लिखा था। अब राजनैतिक लाभ के मद्देनजर चंबल प्रोग्रेस-वे का नाम बदलने की घोषणा ‘अटल प्रोग्रेस-वे” को उपचुनाव में भुनाने की तैयारी है।

भोपाल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की द्वितीय पुण्य तिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करतें हुए कहा है कि मध्यप्रदेश के उत्तरी अंचल में विकसित होने वाले चंबल एक्सप्रेस-वे (प्रोग्रेस-वे) का नाम वाजपेयी के नाम पर ‘अटल प्रोग्रेस-वे’ होगा। शिवराज ने ट्वीट करतें हुए बताया कि स्व.अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उनका पुण्य स्मरण करते हुए हमने चंबल प्रोग्रेस वे का नाम ‘अटल विहारी वाजपेयी चंबल प्रोग्रेस वे’ करने का निर्णय लिया है। हम सब उन्हें याद करें और पूरी सामर्थ्य के साथ मध्यप्रदेश का नवनिर्माण करें, यही उनके चरणों में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शिवराज की इस घोषणा को मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों के होने वाले उपचुनाव से देखा जा रहा है। ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर उपचुनाव होना है। ये उपचुनाव ही सरकार का भविष्य तय करने वाले हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी इस प्रोजेक्ट में विशेष दिलचस्पी है। सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को इस मुद्दे पर पत्र भी लिखा था। अब राजनैतिक लाभ के मद्देनजर चंबल प्रोग्रेस-वे का नाम वाजपेयी के नाम पर रखे जानें की घोषणा ‘अटल प्रोग्रेस-वे” को उपचुनाव में भुनाने की तैयारी है।

क्या है प्रोग्रेस-वे

चंबल एक्सप्रेस-वे से चंबल प्रोग्रेस-वे अब अटल प्रोग्रेस-वे में तब्दील हुआ फोरलेन मेगा हाईवे का नाम बदलना मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में चुनावी गणित का मेगा हाईवे कहा जा रहा है। प्रोग्रेस-वे का डिजाइन 394 किलोमीटर का है। 6000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक्सप्रेस-वे की पूरा सर्वे एवं डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मध्यप्रदेश रोड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) ने तैयार किया है। इसका निर्माण भारत माला परियोजना के तहत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) करेगा। यह एक्सप्रेस-वे राजस्थान के दीगोद कोटा-बारा नेशनल हाईवे से श्योपुर, मुरैना, भिंड होते हुए भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-92 से जुड़ेगा। मप्र में इसकी लंबाई 309 किमी है और राजस्थान में 85 किमी का हिस्सा है । दोनों को मिलाकर चंबल प्रोग्रेस-वे 394 किमी का होगा। इस एक्सप्रेस वे का जो डिजाइन है वह 100 फीट चौड़ा है और इसे इस मापदंड से बनाया जाएगा जिससे इस पर वाहनों की रफ्तार 100 किमी प्रतिघण्टे तक दौड़ सके।

सड़क मार्गों को जोड़ने वाला एक अनोखा प्रोजेक्ट

यह एक्सप्रेस-वे सड़क मार्गों को जोड़ने वाला एक अनोखा प्रोजेक्ट है जिससे चंबल अंचल के 150 से ज्यादा गांवों में तरक्की का रास्ता भी खुलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सड़क नॉथ-साउथ कॉरिडोर को ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ेगी। मुरैना जिले के गढोरा गांव के पास से गुजरे नेशनल हाईवे नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का पॉइंट है और राजस्थान के दीगोद में कोटा-बारा नेशनल हाईवे के कारण ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर है। यानी यह एक सड़क दोनों कॉरिडोरों को जोड़कर देश की चारों दिशाओं के रास्तों की सुगम कनेक्टिविटी देगी।

सड़क किनारे जहां-जहां सरकारी जमीनें होगीं वहां खुलेगी इंडस्ट्री

प्रोग्रेस-वे के दोनों ओर जहां-जहां सरकारी जमीनें हैं वहां-वहां इंडस्ट्री एरिया बनाए जाएंगे। सरकार की मंशा पूरी हुई तो प्रोग्रेस-वे के किनारे मप्र का सबसे बड़ा इंडस्ट्री कॉरिडोर बनेगा। चंबल नदी किनारे त्रिवेणी संगम, गऊघाट, काऊपुरा घाट आदि कई स्थल हैं जो पर्यटन केन्द्र बनेंगे। इतना ही नहीं कृषि उत्पादन केन्द्र, खाद्य प्रसंस्कर केन्द्र, अस्पताल, स्कूल, होटल, रेस्टोरेंट से लेकर आधुनिक मनोरंजन पार्क भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा निजी रोजगार व खेती के लिए सरकार किसानों को बीहड़ों में जमीन के पट्टे व लीज भी दे सकती है।

कई शहरों की दूरी भी कम हो जाएगी

इस फोर लेन सड़क के बनने से कई शहरों की दूरी कम हो जाएगी। वर्तमान में श्योपुर से भिंड की दूरी लगभग 275 किलोमीटर है। चंबल प्रोग्रेस-वे बनते ही भिंड की दूरी 185 किलोमीटर ही रह जाएगी। यानी श्योपुर और भिंड 90 किमोमीटर पास आ जाएंगे। इसी तरह श्योपुर से कोटा, मुरैना से लेकर उत्तर प्रदेश के कानपुर व अन्य शहरों की दूरी भी काफी कम हो जाएगी।

अभी निजी जमीनों का होना है अधिग्रहण

प्रोगेस-वे के निर्माण पर खर्च होने वाला पूरा पैसा केन्द्र सरकार देगी लेकिन एक्सप्रेस-वे के लिए जो निजी जमीनें अधिग्रहित होनी है उसका खर्च मप्र सरकार को देना है। सरकार किसानों को जमीन के बदले दूसरी जमीन देना चाहतीं है जबकि किसान सरकार द्वारा प्रस्तावित की जा रही भूमि लेने को तैयार नहीं है। कुछ किसान प्रोग्रेस-वे के लिए अपने खेत व जमीन देने को तैयार तो हैं परंतु उसके बदले नगद मुआवजा चाहते हैं और मप्र सरकार ने फिलहाल इसके लिए एक रुपये का भी बजट नहीं रखा है। वैसे जमीन अधिग्रहण का मामला इतना आसान भी नहीं है इसलिए सरकार अधिग्रहण के जिन्न को उपचुनाव के बाद ही छेड़ेगीं।

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